शिक्षा का प्रारंभिक जीवन

शिक्षा मानव जीवन में जन्म के उपरांत ही शुरू हो जाती है जब बच्चे छोटे होते हैं तो सबसे पहले घर में अपने माता पिता दादा दादी और चाचा चाची व घर के अन्य सदस्यों को बोलते हुए सुनते हैं औऱ फिर उन्ही का अनुशरण करते हुए बोलना प्रारम्भ करते हैं यही से उनकी शिक्षा आरंभ हो जाती है।
जब कुछ बड़े होते हैं तो आस पड़ोस के लोगों के संपर्क में आते हैं औऱ ऐसी क्रम में जैसे दादा दादी व नाना नानी की कहानियां सुनते हैं इन सभी से वह अपनी शिक्षा की सुरुआत करता है फिर जब कुछ बड़ा होता है तो विद्यालय जाना शुरू करता है और विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करता है एक तरह से देखा जाए तो सीखना ही शिक्षा है और मनुष्य हो जीवन पर्यंत कुछ न कुछ सीख मिलती रहती है।

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